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समर शेष है: संकल्प और संघर्ष के तालमेल की सार्थक अभिव्यक्ति है उपन्यास

05:02 PM Dec 04, 2022 IST | Subodh Gargya
समर शेष है  संकल्प और संघर्ष के तालमेल की सार्थक अभिव्यक्ति है उपन्यास
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‘समर शेष है’ हिंदी के जाने माने लेखक अब्दुल बिस्मिल्लाह का आत्म-कथात्मक उपन्यास है। इस उपन्यास में लेखक ने अपने बचपन से जवानी तक के संघर्ष की कहानी कही है। कम उम्र में अपनी मां को खो चुका बालक अपने पिता के साथ कई रिश्तेदारों के यहां रहता है, जहां उसे यातनाएं ही सहनी पड़ती हैं। जैसे-तैसे वह अपनी पढ़ाई जारी रखता है।

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उपन्यास में रचनाकार बताते हैं कि कैसे अपने जीवन को बचाये रखने के लिए वह जूझते रहे। कम उम्र में बर्तन मांजने से लेकर मजदूरी करने तक का काम किया, सर पर छत और दो वक्त की रोटी के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा।
लेखक लिखते हैं, ”… मैं जी रहा था। जी रहा था और झेल रहा था। अपनी तमाम यतीमी और शर्मनाक स्थितियों के बावजूद। खुद को तोड़कर, नंगा करके- मैं जी रहा था।”

इस रचना में लेखक ने जो लिखा है वह सबकुछ उनका भोगा हुआ है। इसलिए यह उपन्यास हकीकत के बहुत करीब है। इस रचना में अब्दुल बिस्मिल्लाह लिखते हैं, ” जीवन की संपूर्ण सुंदरता और पवित्रता संभवत: उसके घिनौनेपन और उसकी वीभत्सता की प्रेरणा से ही जन्म लेती है। ” ऐसी न जाने उपन्यास में कितनी पंक्तियां हैं, जिसे पढ़कर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। मसलन एक लाइन है, ”जिंदगी फिर भी एक खूबसूरत चीज है- अपनी तमाम बदतमीजियों के बावजूद। वह भले ही कोई बहुत बड़ा सवाल हो, पर मौत उसका जवाब नहीं है।”

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अब्दुल बिस्मिल्लाह के इस उपन्यास को आप पढ़ेंगे तो महसूस करेंगे कि उनका संघर्ष आपक संघर्ष है। पाठक रचना को पढ़ खुद को जोड़ लेता है। इसे एक लाइन से समझिए, ‘‘ संघर्ष केवल वही नहीं है जो चंद खास लोगों और चंद आम लोगों के बीच होता है, संघर्ष किसी आदमी का जीवित रहना भी है ….इस तरह आदमी एक इतिहास है।… मैं चल रहा था। चल रहा था और जी रहा था… जीने के लिए भीख मांगना जरूरी था…”

जहां एक ओर उपन्यास जीवन के संघर्ष को दिखाता है, वहीं दूसरी ओर प्रेम के अनुभव भी लिखे हैं। अपने अनुभव के बारे में लेखक खुद लिखते हैं, ”क्योंकि प्रेम अंतत: एक खूबसूरत मजाक के अलावा और कुछ नहीं है।”

अगर आप इस किताब को पढ़ना चाहते हैं तो राजकमल प्रकाशन से खरीद सकते हैं। किताब पेपरपैक रूप में बहुत कम कीमत पर उपलब्ध है। रचना 165 पेज की है, इसे आप कम समय में पढ़ सकते हैं।

लेखक के बारे में:

अब्दुल बिस्मिल्लाह हिन्दी साहित्य जगत के प्रसिद्ध उपन्यासकार हैं। उनकी पहली रचना ‘झीनी झीनी बीनी चदरिया’ हिन्दी कथा साहित्य की एक मील का पत्थर मानी जाती है। उन्होंने उपन्यास के साथ ही कहानी, कविता, नाटक जैसी सृजनात्मक विधाओं के अलावा आलोचना भी लिखी है।

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