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6 दिसंबर: उस शाम जो सूरज डूबा वो हिंदू -मुस्लिम रिश्तों को भी स्याह कर गया

उस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी के समर्थक ,कार्यकर्ता और कारसेवक बहुत बड़ी संख्या में अयोध्या स्थित मस्जिद कह लीजिए या विवादित ढांचा, के आस-पास जमा होने लगे थे।
07:00 AM Dec 06, 2022 IST | Subodh Gargya
6 दिसंबर  उस शाम जो सूरज डूबा वो हिंदू  मुस्लिम रिश्तों को भी स्याह कर गया
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Babri Masjid Demolition Anniversary : वो रविवार कोई आम रविवार नहीं था। उस रविवार ने हिंदुस्तान के इतिहास पर ऐसी छाप छोड़ी कि आज भी लोग उस दिन को याद करते हैं। हिंदुस्तान की दो बड़ी आबादियों हिंदू और मुस्लिम के रिश्तों पर उस रविवार ने ऐसा असर छोड़ा कि सियासत की दुनिया हो या रोजमर्रा की, जिक्र उसका बार-बार उठता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं, दिसंबर 1992 के पहले रविवार यानी 6 तारीख की।

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उस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी के समर्थक ,कार्यकर्ता और कारसेवक बहुत बड़ी संख्या में अयोध्या स्थित मस्जिद कह लीजिए या विवादित ढांचा, के आस-पास जमा होने लगे थे। आज भी उस दिन के वीडियो देखे जाएं तो कहा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती ने धुआंधार भाषण दिया। जिसने कारसेवकों को उत्तेजित किया। फिर क्या था कार्यकर्ता और समर्थक भी जोश से भरकर नारेबाजी करने लगे।

वैसे तो ढांचे या मस्जिद की हिफाजत के लिए पुलिस का घेरा लगाया गया था। लेकिन दिन चढ़ते -चढ़ते एक कारसेवक पुलिस के घेरे को तोड़ने में कामयाब हो गया और ढांचे के ऊपर जा चढ़ा और भगवा झंडा लहरा दिया। इसे देख बाकी कारसेवक भी ढांचे की ओर लपके। पुलिस का घेरा इन लोगों के लिए नाकाफी साबित हुआ। फिर क्या था कारसेवक हथौड़े और लोहे की छड़ से ढांचे पर हमला करने लगे। शाम होते-होते ढांचा धूलधूसरित हो गया। बाबरी मस्जिद के गिराये जाने या विवादित ढांचे के गिराये जाने ने भारतीय मुसलमानों को झकझोर कर रख दिया।

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Babri Masjid Demolition Anniversary : वैसे ये घटना यूं ही नहीं घटी, इसकी एक पृष्ठभूमि रही है

  • 1822 में पहली बार दावा किया गया कि बाबरी मस्जिद रामजन्मभूमि पर बनी है
  • 1855 में पहली बार सांप्रदायिक हिंसा हुई
  • 1859 में विवाद को रोकने के लिए रेलिंग बनायी गयी
  • 1949 में मस्जिद में मूर्तियां रखी गयीं, जिसके बाद मस्जिद को ताला लगा दिया गया
  • 1980 आते-आते राममंदिर की मांग उठने लगी
  • 1986 में ताला खोल दिया गया और हिंदुओं को विवादित स्थल पर पूजा करने की इजाजत मिली
  • 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर के लिए रथ यात्रा निकाली
  • 1992 में बाबरी विध्वंस हुआ

Babri Masjid Demolition Anniversary : जस्टिस लिब्राहन की रिपोर्ट क्या कहती है?

Babri Masjid Demolition Anniversary : बाद में साल 2009 में आई जस्टिस लिब्राहन की रिपोर्ट के मुताबिक 68 लोग बाबरी विध्वंस के लिए कसूरवार थे। जिनमें से अधिकतर बीजेपी नेता थे। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी समेत लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विजया राजे सिंधिया का नाम इसमें सामने आया। रिपोर्ट में तत्कालीन कल्याण सिंह की यूपी सरकार को भी जमकर फटकार लगाई गयी थी।

लिब्रहान रिपोर्ट की मानें तो यूपी सरकार ने जानबूझकर इस विध्वंस को होने दिया। उसके अफसरों ने इसे रोकने के बाबत कुछ नहीं किया और मूकदर्शक बने रहे। यही नहीं उस समय की केंद्र सरकार, यानी पीएम नरसिम्हा राव की सरकार को भी आड़े हाथ लिया गया कि उसके द्वारा इस विध्वंस को रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया।

हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट में ये बात कही गयी कि बीजेपी नेताओं ने कार्यकर्ताओं को नीचे उतरने के लिए कहा था। लेकिन ये अपील उतनी दमदार नहीं थी, जितना वो भाषण जिसके चलते ये कार्यकर्ता ढांचे पर जा चढ़े थे। बाबरी विध्वंस को लेकर एक आरोप ये भी लगाया जाता है कि यह महज एक घटना नहीं थी बल्कि एक साजिश थी। जिसकी योजना काफी पहले बनायी गयी थी।

हालांकि तत्कालीन यूपी सीएम कल्याण सिंह के मुताबिक, ”ये साजिश नहीं थी , बल्कि हिंदुओं की भावनाओं का स्वत: स्फूर्त विस्फोट था। हमने सुरक्षा का इंतजाम किया था लेकिन फिर भी ढांचा टूट गया। कई बार ऐसा होता है कि सुरक्षा के इंतजाम धरे के धरे रह जाते हैं। मैंने सुरक्षा के पक्के इंतजाम किये थे। हालांकि मैंने पुलिस को कहा था कि गोली नहीं चलानी। ढांचा नहीं बचा, मुझे इस बात का कोई गम नहीं है। ये दिन शर्म का नहीं गर्व का विषय है। ”

वहीं पू्र्व पीएम वाजपेयी ने बाबरी के गिरने से पहले कहा था, ”सुप्रीम कोर्ट ने कारसेवा करने से रोका नहीं है बल्कि कोर्ट ने आदेश दिया है कि कारसेवा करें।…..वहां नुकीले पत्थर निकलेंगे, उस पर तो कोई नहीं बैठ सकता। जमीन को समतल करना होगा।….”

इसके बाद साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में विवादित जमीन को हिंदू पक्ष को सौंप दिया और राम मंदिर निर्माण के लिए रास्ता खुल गया। इस समय अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण जारी है।

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